“कुल कर्ज़ का बोझ जनता पर डालकर कोरोना टीका मुफ़्त में दिया गया है” – मोदी सरकार ने धोखा दिया है। – पत्रकार गोपाल एस.
“कुल कर्ज़ का बोझ जनता पर डालकर कोरोना टीका मुफ़्त में दिया गया है” – मोदी सरकार ने धोखा दिया है। – पत्रकार गोपाल एस.
“कोरोना महामारी के दौरान, मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और भाजपा ने जनता को यह कहकर प्रचारित किया कि ‘मुफ़्त कोरोना टीके’ दिए जा रहे हैं और हमेशा की तरह इसे ‘मोदी का तोहफ़ा’ बताया।
लेकिन हकीकत यह है कि मोदी सरकार ने सिर्फ़ कोरोना टीके ख़रीदने के लिए ही विदेशी बैंकों से लगभग 26,460 करोड़ रुपये का क़र्ज़ लिया। इस 26,460 करोड़ रुपये के विदेशी क़र्ज़ को भारतीय जनता अपने टैक्स के पैसों से चुका रही है। यह 26,460 करोड़ रुपये सिर्फ़ टीकों के लिए ही लिया गया था।
कुल मिलाकर, कोरोना से निपटने के लिए मोदी सरकार ने लगभग 7.25 बिलियन डॉलर (लगभग 64,000 करोड़ रुपये) का विदेशी क़र्ज़ लिया।
कोरोना काल में मोदी ने पीएम केयर्स फंड बनाया और हज़ारों करोड़ रुपये का चंदा इकट्ठा किया। इसके बावजूद मोदी सरकार लगातार यह कहते हुए पीएम केयर्स फंड का ब्यौरा सार्वजनिक करने से इंकार करती रही कि यह एक ‘निजी कोष’ है।
यह फंड राष्ट्रीय प्रतीक और सरकारी वेबसाइट का इस्तेमाल करता है। अगर मोदी सरकार को कोरोना काल में 64,000 करोड़ रुपये का विदेशी क़र्ज़ लेना पड़ा, तो फिर पीएम केयर्स फंड का उद्देश्य क्या था?
जब 26,460 करोड़ रुपये के विदेशी क़र्ज़ से टीके खरीदे गए और जनता पर बोझ डाला गया, तो ये कोरोना टीके कैसे ‘मुफ़्त’ कहलाते हैं?
किसने पीएम केयर्स फंड में दान दिया, यह किसी को नहीं पता। यह मोदी का निजी गुप्त कोष है जिसमें दान लिया गया।
इस फंड के पैसों को किस तरह खर्च किया जा रहा है, इसका कोई विस्तृत हिसाब नहीं है। कोरोना के नाम पर लिए गए हज़ारों करोड़ रुपये के विदेशी क़र्ज़ को चुकाने के लिए भारतीयों को मजबूर किया गया है।
उसी समय मोदी गुप्त रूप से अपने निजी पीएम केयर्स फंड का आनंद उठा रहे हैं। यह एक डकैती है। कोरोना को बहाना बनाकर मोदी और भाजपा के हित में चलाया गया एक बड़ा घोटाला ही पीएम केयर्स फंड है।”
– पत्रकार गोपाल एस.जे.
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